शेखर सुमन पटना पहुँचते ही बॉलीवुड पर किया बड़ा खुलासा

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बिहारी अभिनेता शेखर सुमन आज पटना में सुशांत सिंह के घर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुँचे और सुशांत के परिवार वालो से मिले, वही शेखर सुमन ने आज मीडिया के सामने बॉलीवुड के बारे में खुलकर बोला और कहा जैसे अंडरवर्ल्ड हुआ करता था वैसे ही बॉलीवुड में गैंग गिसम चल रहा है, शेखर सुमन ने सुशांत सिंह की मौत की सीबीआई कि जांच की मांग भी की, शेखर सुमन कहते है की इतनी बड़ी ट्रैजडी है इसमें कुछ बात करने की जरूरत नहीं है इस दुख में शामिल होने की जरूरत है, और एक बिहारी होने के नाते और एक कलाकार होने के नाते जो सपोर्ट की जरूरत है उसके लिए मैं यहां आया हूं मेरे जो शब्द हैं अभी तक स्तब्ध है बहुत लोगों ने मुझसे पूछा कि आप क्यों जा रहे हैं आपका कौन लगता है हमने कहा कि हम एक ही मिट्टी से हैं एक ही मिट्टी के पैदाइश है बहुत बड़ा नाता है एक जज्बाती नाता है इसलिए मेरा जाना बहुत जरूरी होता है इसीलिए मैं यहां आया हूं करोना के बावजूद बहुत लोगों ने कहा है कि अभी जाना सही नहीं है लेकिन मुझे लगा कि ऐसे वक्त में यह सब नहीं देखा जाता और मैंने एक मुहिम शुरू की है अपने आप ही सोशल मीडिया पर जिसका नाम है जस्टिस फॉर सुशांत उसमें लाखों लोग जुड़ गए हैं और हम सब की है मांग है जो हुआ है और जो दिखाई दे रहा है जो आंखों को दिखाई दे रहा है उससे कहीं कुछ ज्यादा प्रतीत होता है और जो आकाश मात मृत्यु के बाद अचानक एक स्क्रिप्ट तैयार की गई एक नरेेटिव जो था आत्महत्या बजाय इसके कि यह एक आत्महत्या प्रतीत होता है यह संदिग्ध मौत है हम जांच पड़ताल और तफ्तीश करने के बाद ही आपको बता पाएंगे की असलियत क्या है.

 

बहुत तरह की बात है मैंने पुरजोर तरीके से यह कहा है कि सिर्फ नेपोटिज्म का सवाल नहीं है नेपोटिज्म जो है गलत शब्द है यह गैंगिज्म का सवाल है एक गैंग एक माफिया है जो हमारी फिल्म इंडस्ट्री में पहले अंडरवर्ल्ड के नाम से जाना जाता था उसका स्वरूप बदल गया है हमारे फिल्म इंडस्ट्री में कुछ ऐसे लोग आ गए हैं जिन्होंने इंडस्ट्री को पूरी तरह से कब्जा कर लिया है उनके कहे बगैर कोई पत्ता भी नहीं हीलता वही जिंदगी आप बनाते हैं वही जिंदगीया बिगड़ते हैं अंडरवर्ल्ड जो बाहर का है उसमें मालूम नहीं है कि कौन-कौन है लेकिन अंडरवर्ल्ड है इसीलिए यह जो गैंग है इसमें नाम लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि प्रमाण नहीं है लेकिन है यह एक नेक्सेस है जो लोगों को अपने बंधन में जकड़ लेता है अपने दायरे में और जो भी छोटे शहरों से कोई आता है और हुनर जो पनपता है और उनके दायरे में जो लोग हैं उनको लगता है कि हमारा सिंहासन डोल रहा है तो इसको या तो खत्म कर दो या इन नेक्सेस के सर्टिफिकेट में शामिल कर लो अगर वह जी हुजूर कर हजूरी करता रहा चापलूसी करता रहा तलवे चाटते रहा तो ठीक है अगर उसने जिस तरह सुशांत ने जैसा कि मैं ऐसा समझ रहा हूं कि उसने बगावत की होगी या उसने कहा होगा कि मुझे यह फिल्में नहीं करनी है यह करूंगा इससे नहीं जुड़ना है उससे जुरुँगा उसका खामियाजा उसको भुगतना पड़ा मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यही वजह हो सकती है उसके साथ लेकिन यह भी एक वजह हो सकती है उस कैलकुलेशन के दायरे में मेरा यह कहना है कि जब लाखों करोड़ों लोगों के दिमाग में यह सवाल उठ रहा है जो दिखाई दे रहा है जो प्रतीत हो रहा है उससे कहीं ज्यादा कुछ है तो सीबीआई जांच करा दी जाए इसमें क्या है हमें आप विश्वास दिला दीजिए आश्वासन दिला दीजिए की हत्या नहीं आत्महत्या हुई है तो कोई कुछ नहीं कर रहा है कह रहा है लेकिन जो तत्व बाहर निकल कर आए जिससे प्रतीत होता है कि इस खेल में और भी कुछ गुत्थी है कुछ पेच है जिसको सुलझाना चाहिए कुछ जो अनसुलझे सवाल है जो प्रश्न है उसका निदान जरूरी है इसका समाधान तभी होगा जब सीबीआई जांच होगी एक बिहारी होने के नाते आवाज उठाएंगे उसी के लिए मैं यहां आया हूं मुझे कहीं भी जाना हो एक प्रेशर बना सकते हैं एक स्टैंड दे सकते हैं हमें यह चाहिए हम अपनी मांग कैसे मनवाए या तो आप आवाज उठाते हैं
मैंने पूरी कोशिश कि कि मैं मुख्यमंत्री से मिल पाऊं मैंने उन तक संदेशा भी पहुंचाया लेकिन मुझे यह बताया गया कि कोविड-19 स्थिति में वह किसी से नहीं मिल रहे हैं मेरी इच्छा थी कि यहां के स्टेट गवर्नमेंट की तरफ से यह खास तौर पर यह जो डाला जाए तवज्जो दी जाए कि महाराष्ट्र सरकार और केंद्र पर भी कि यह बताएं उन पर जोर डाले के इसके सीबीआई इंक्वायरी होनी चाहिए लेकिन अफसोस
मुझे मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव का मैसेज आया था श्री चंचल जी का कि वह कोविड-19 की वजह से वह नहीं मिल पाएंगे मैं आया था मुझे लगा था कि मैं सुशांत के पिता जी से भी मिल लूंगा और उनका दुख शेयर करूंगा और मुख्यमंत्री से भी मिल कर जाऊंगा लेकिन अफसोस कि नहीं मिल पाए लेकिन उन्हें मैसेज के जरिए का दूंगा मैं जो कहने आया हूं अब वह जाने वह क्यों नहीं आए लेकिन मुख्यमंत्री को यहां आना तो चाहिए था मुझे नहीं पता वह क्यों नहीं है बिहार के एक नौजवान के साथ ऐसी घटना हुई है उन्हें आना चाहिए था कहते हैं बड़ी मुश्किल से इस तरह के होने वाले हैं इंसान आते हैं अपने बलबूते पर अपना एक मकाम तय करता है ऊंचाइयां चढ़ता है और इस तरह तारा की तरह अवतरित हुआ आकाश में और धूमिल हो गया बुझ गया मुख्यमंत्री को आना चाहिए था क्योंकि हम सब की है एक नैतिक जिम्मेवारी है किसी को हम दोषी नहीं मानते सब अपने हिसाब से हैं मुझे ऐसा लगा कि मुझे बोलना चाहिए इस आवाज को उठाना चाहिए कोई आए ना आए मुझे ऐसा लगता है कि मैं हूं
इनके फिल्म बड़े पर्दे पर तो कब रिलीज होगी जब कोविड-19 स्थिति खत्म होगा को नहीं मालूम जब तक वैक्सीने नहीं निकल जाता कोई थियेटर जाने वाला नहीं है अगर वह जाएगा नहीं तो उस फिल्म का हश्र बुरा हो सकता है कम से कम वह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो जाएगा पूरी दुनिया जरूर देखेगी और हम चाहेंगे कि पूरी दुनिया उनकी यह आखरी काम को देखें और सराहे है जो भी हो रहा है बहुत सोच विचार कर हो रहा है.

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