विधानसभा चुनाव पर गंभीरता से विचार करें चुनाव आयोग: विपक्ष

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बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश की तमाम विपक्षी पार्टियों को एक बार फिर कोविड-19 के फैलते प्रभाव को लेकर एकजुटता दिखायी गयी।  आज सूबे की 9 प्रमुख विपक्षी पार्टियों के प्रतिनिधियों ने दिल्ली के कंस्टीयूच्यूशन क्लब में बैठक की।  पार्टी अधिकारियों ने अपनी बैठक में बिहार में फैलते कोरोना को लेकर सरकार की असफलता पर चिंता जतायी।  इस मौके पर पार्टी के पदाधिकारियों ने अपने-अपने विचार रखे और एक सामूहिक मांग पत्र चुनाव आयोग को सौंपा।  इन लोगों का कहना है कि चुनाव एक संवैधानिक कार्य है जिसे कब और कैसे संपन्ना करना है, यह चुनाव आयोग तय करता है।  लेकिन कोरोना जैसे महामारी के कारण जरूरी बातों का अवश्य ध्यान रखें।  जिस तरह से कोरोना अपना पैर पसार रहा है उस स्थिति को देखते हुए जरूरी है कि 1000 की जगह 250 वोटरों पर एक वोट का इंतजाम किया जाए।  यह संख्या कम रखते हुए सामाजिक दूरियों के साथ-साथ अन्य कार्यक्रमों को करना आसान होगा।  यह जरूरी है कि चुनाव के साथ-साथ इस मौके पर मानवता का ख्याल रखा जाए।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि मतदाताओं को चुनाव के समय चुनावी रैलियों के माध्यम से ही पार्टियां अपनी नीतियों और योजनाओं से जनता को अवगत कराती रही है।  कोविड-19  के कारण सामान्य तौर पर ऐसी रैलियां संभव नहीं है और विकल्प के तौर पर वर्चुअल रैली की बात करना पूरी तरह से अवैध व्यवहार है,  तकनीक पर आधारित वर्चुअल रैली के लिए स्मार्ट फोन और नेट कनेक्टविटी का होना अनिवार्य है जबकि वास्तविकता यह है कि बिहार की 50 फीसद लोगों के पास फोन है और कुल फोन धारकों के 35 फीसद लोगों के पास स्मार्ट फोन है।  ऐसे में कुल आबादी का 15 फीसद लोग ही इस कथित वर्चुअल रैली के दौरान कवर हो सकते हैं।  यह हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्था और चुनावी राजनीति पर कड़ा प्रहार है और साथ ही बिहार की जनता के साथ नाइंसाफी है।  बिहार की पूरी विपक्षी पार्टियां मांग करती हैं कि चुनाव आयोग इस मुद्दे को गंभीरता से ले और तमाम पक्षों का मूल्यांकन करते हुए जनहित: फैसला ले।

पार्टी अधिकारियों ने बाद में चुनाव आयोग के साथ दिल्ली में वर्ग बैठक की।  इस मिंटिग में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ-साथ दोनों चुनाव आयुक्तों ने विपक्षी दलों की मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया।  चुनाव आयोग के साथ संपन्न हुई इस वर्ग बैठक में सर्वश्री शक्ति सिंह गोहिल (कांग्रेस), डी राजा (सीपीआई), सीताराम यचुरी (सीपीआईएम), दीपंकर भट्टाचार्य (सीपीआईएमएल), उपेन्द्र कुशवाहा (रालोसपा), राजीव मिश्रा (वीआईपी),  मनोज झा  (आरजेडी) के साथ-साथ शरद यादव और हम के प्रतिनिधियों में भी शामिल थे।

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