देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद के परिवार के लाल अमेरिका छोड़ अपनी मातृभूमी की सेवा में लगे

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आज के समय में बहुत कम ही लोग होते है जो सरकारी नौकरी के बड़े पद पर रहने के बाद भी अचानक नौकरी छोड़ पढ़ने के लिए विदेश चले जाते है और अमेरिका जैसे देश में 10 साल में अपने आप को पूरी तरीके से स्थापित भी कर तो लेते है लेकिन मातृभूमि के प्रति प्रेम ही है जो अपनी मिट्टी से जुड़े लोगों की सेवा का भाव उन्हें वापस लौटनेे को मजबूर कर देता है इस तरह के बहुत ही कम उदाहरण वाले लोग मिलते हैं

हम बात कर रहे हैं देश रत्न डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद के परिवार से आने वाले पेशे से आईटी इंजिनियर मनीष सिंहा की जिन्होंने शुरुआती पढ़ाई पटना के st. Micheal स्कूल से की, बाद में इंटर पटना साइंस कालेज से, पढ़ाई में काफी मेघावी होने के कारण पहली बार में राज्य स्तर की इंजीनियरिंग की परीक्षा पास कर वारंगल में एडमिशन लिया में लिया और इंजीनियरिंग खत्म होने के पश्चात ही भारत पेट्रोलियम में नौकरी लग गई

चेन्नई और मुंबई में 10 साल काम किया, शादी भी हो गई एक बेटी भी है पर उन्हें अब भी बहुत कुछ अधूरा सा महसूस हुआ और वो यहीं नहीं रुके एक बहुत बड़ा रिस्क लिया और नौकरी छोड़ अमेरिका चले गए वहां से मास्टर की डिग्री ली और नौकरी भी,  कंपनियों में काम करते हुए विभिन्न देशों की यात्रा की और उन्होंने समाज और कार्यशैली की समझ परख लेते हुए उन्हें लगा कि अब भी कुछ अधूरा है तभी तो लगभग अमेरिका में 12 साल वो सब हासिल किया, लेकिन अपनी मिट्टी से लगाव ने उन्हें बिहार लौटने पर मजबूर कर दिया,

भारत लौटने के बाद उन्होंने एक आईटी कंपनी शुरू की जिसके देश विदेश में बहुत सी कंपनियां क्लाइंट्स है, अपनी मातृभूमि अपने गृह जिले के लोगो के लिए प्रति वर्ष स्वास्थ्य शिविर लगाते है, वृद्ध लोगों के आंखो का ऑपरेशन इलाज करवाते हैं और उनके पटना में रहने की व्यवस्था खुद ही उठाते हैं, इसके लिए किसी भी तरह का सरकारी मदद नहीं लेते है, युवाओं के लिए हर साल क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन, हर साल 3 दिसंबर को देश रत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद के जन्मदिन पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित करते है, यह कार्यक्रम पटना और दिल्ली में ये आयोजित होते है जिसमें देश के बड़े-बड़े मंत्री और समाजसेवी पत्रकार इसमें हिस्सा लेते है

मनीष सिन्हा की माने तो बिहार के गौरवशाली इतिहास को वापस लाना चाहते है और देश के अग्रणी राज्यो में बिहार को लाना चाहते है और इसके लिए उन्होंने ने बिहार पोसेटिव कार्यक्रम चला रहे है जिसके लिए उन्होंने नॉन रेसिडेंशियल बिहार को कन्वेनर बनाया है

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